योग और वैराग्यसंन्यास का सही अर्थ क्या है?विहित और निषिद्ध कर्मों में दोष-गुण बुद्धि का त्याग संन्यास है; इष्ट-अनिष्ट कर्मों को छोड़ना न्यास है।#संन्यास#न्यास#विहित कर्म
योग और वैराग्यशम का लक्षण क्या है?जिसकी इन्द्रियाँ अपने या दूसरे के लिये मिथ्या प्रवृत्त नहीं होतीं, उसमें शम का लक्षण है।#शम#इन्द्रिय संयम#मिथ्या प्रवृत्ति
दान और साधुधर्मसाधुधर्म क्या है?श्रुति-स्मृति से विहित, वर्णाश्रम से सम्बद्ध और शिष्टाचार के अनुकूल धर्म साधुधर्म है।#साधुधर्म#श्रुति#स्मृति
दान और साधुधर्मदान का सही लक्षण क्या है?न्यायपूर्वक अर्जित प्रिय द्रव्य को गुणी पात्र को देना दान का लक्षण है।#दान#न्यायपूर्वक धन#गुणी पात्र
धर्म और आचारदया किसे कहा गया है?अपने हित-अहित की तरह सभी प्राणियों के हित-अहित का ध्यान रखने वाली निरंतर वृत्ति दया है।#दया#सभी प्राणी#हिताहित
धर्म और आचारसत्य बोलने का सही अर्थ क्या है?पूछे जाने पर देखे गए कथनयोग्य और अकथनीय विषय को बिना छिपाए व्यक्त करना सत्य कहा गया है।#सत्य#वाणी#देखा हुआ
धर्म और आचारधर्म और अधर्म का सही अर्थ क्या है?कुशल कर्म धर्म और अकुशल कर्म अधर्म है; जिससे अभीष्ट मिले वह धर्म और जिससे अनिष्ट मिले वह अधर्म है।#धर्म#अधर्म#कुशल कर्म
साधु और संतसाधु किसे कहा जाता है?जो अपने आश्रम के धर्म का साधन करता है, वह साधु कहा गया है।#साधु#ब्रह्मचारी#गृहस्थ
धर्म और आचारद्विजाति किसे कहा गया है?ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य सामान्य और विशेष पदार्थों से सम्बन्धविशेष के कारण द्विजाति कहे गए हैं।#द्विजाति#ब्राह्मण#क्षत्रिय
साधु और संतसंत किसे कहा गया है?सत् शब्द का अर्थ ब्रह्म है; जो अंत में ब्रह्म को प्राप्त करते हैं, वे संत कहलाते हैं।#संत#सत्#ब्रह्म