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विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार 12 महीनों और अधिक मास में गणेश जी के 13 विशिष्ट स्वरूपों की पूजा होती है: चैत्र- विकट, वैशाख- चाणक्र राज एकदंत, ज्येष्ठ- कृष्ण पिंगल, आषाढ़- गजानन, श्रावण- हेरम्ब, भाद्रपद- विघ्नराज, आश्विन- वक्रतुंड, कार्तिक- गणाधिप, मार्गशीर्ष- अखुरथ, पौष- लम्बोदर, माघ- द्विजप्रिय, फाल्गुन- भालचंद्र, और अधिक मास में- विभुवन पालक महागणपति।
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