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विस्तृत उत्तर
आदित्य काल और प्रकाश के देव इसलिए माने गए हैं क्योंकि वे वर्ष के १२ मासों और ब्रह्माण्डीय नियमों के परम नियामक हैं। वे सम्पूर्ण दृश्य और अदृश्य जगत में प्रकाश और ज्ञान का संचार करते हैं। पितृकर्म में आदित्य परम शुद्ध, प्रकाशमय और उच्चतम पितृ अवस्था के सूचक हैं। वे जीव की उस अवस्था का प्रतिनिधित्व करते हैं जो जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होने, मोक्ष प्राप्त करने या उच्चतम स्वर्गीय गति प्राप्त करने के निकट है।
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