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विस्तृत उत्तर
चौथे दिन के पिण्डदान से प्रेत के पिण्डज शरीर का पृष्ठभाग, अर्थात पीठ, बनता है। यह पिण्डज शरीर के क्रमिक निर्माण का चौथा चरण है। पहले दिन सिर, दूसरे दिन गर्दन और कंधे, तीसरे दिन हृदय और वक्षस्थल, और चौथे दिन पीठ की संरचना पूर्ण होती है।
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