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विस्तृत उत्तर
दूसरों के घरों या संपत्तियों में आग लगाने वाले, दूसरों को विष देने वाले और प्राणियों की निरर्थक हिंसा करने वाले कुमार्गगामी मनुष्य पिशाच योनि के अधिकारी होते हैं। ये कर्म तीव्र क्रूरता के अंतर्गत आते हैं। पिशाच योनि प्रेत से भी अधिक मलिन, तामसिक, हिंसक और नकारात्मक मानी गई है। जो जीव दूसरों को पीड़ा पहुँचाने, नष्ट करने और विष देकर हानि करने में लिप्त रहता है, उसका सूक्ष्म शरीर मृत्यु के बाद उसी ध्वंसात्मक और तामसिक संस्कार के कारण पिशाच योनि में गिरता है।
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