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विस्तृत उत्तर
जिन पूर्वजों की मृत्यु दुर्घटना, हिंसा या अन्य अकाल परिस्थिति में हुई हो, उनका श्राद्ध पितृ पक्ष की चतुर्दशी को किया जाता है। शास्त्रों में विशेष मृत्यु-स्थितियों के लिए विशेष तिथियाँ बताई गई हैं। अकाल मृत्यु वाली आत्माओं की स्थिति सामान्य मृतात्माओं से भिन्न मानी जाती है, इसलिए चतुर्दशी श्राद्ध का विधान उनकी शांति और मुक्ति के लिए किया गया है।
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