विस्तृत उत्तर
अर्जुन ने निवातकवचों और कालेयों से रसातल में भीषण युद्ध किया। वे इंद्र के सारथी मातलि के दिव्य रथ पर सवार होकर महासागर की गहराइयों को चीरते हुए रसातल पहुँचे। अर्जुन के रथ की गर्जना सुनकर दानवों को लगा कि स्वयं इंद्र आक्रमण करने आए हैं। अर्जुन ने देवदत्त शंख की प्रलयंकारी ध्वनि की, जिससे रसातल की गुफाएँ गूंज उठीं। निवातकवचों ने मायावी शक्तियों से तीक्ष्ण बाणों, लौह अस्त्रों, गदाओं और त्रिशूलों की वर्षा की तथा पाषाण और अंधकार की माया उत्पन्न की। एक समय मातलि भी भ्रमित हो गए, पर अर्जुन विचलित नहीं हुए। उन्होंने दिव्यास्त्रों से उनकी माया नष्ट की और इंद्र से प्राप्त वज्रास्त्र तथा ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर तीन करोड़ निवातकवचों और कालेयों का संहार किया।
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