विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत (5.24.14) के अनुसार इस लोक के निवासियों को बुढ़ापा, पसीना, बीमारी, थकावट, सफेद बाल, झुर्रियां या शारीरिक कांति का क्षीण होना जैसी कोई भी शारीरिक दुर्बलता नहीं सताती। वे बिना किसी शारीरिक क्षय के निरंतर युवावस्था में अपना जीवन व्यतीत करते हैं। यहाँ का वातावरण विशुद्ध रूप से भौतिक भोगों के लिए निर्मित है जहाँ ऐश्वर्य, शारीरिक सुख और विलासिता के साधनों की कोई सीमा नहीं है। यहाँ दिन-रात न होने के कारण यहाँ के निवासियों को समय के बीतने का भी भान नहीं होता और न ही उन्हें काल से उत्पन्न होने वाला कोई भय सताता है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





