विस्तृत उत्तर
बल असुर दानवराज मय का पुत्र और अतल लोक का शासक है। श्रीमद्भागवत महापुराण के पंचम स्कंध के चौबीसवें अध्याय में इसका विशद वर्णन है। शास्त्रों में बल असुर का वर्णन एक ऐसे मायावी सत्ता के रूप में किया गया है जिसने अपने तपोबल और जादुई शक्तियों से छियानवे (96) प्रकार की मायाओं का सृजन किया है। देवी भागवत पुराण भी इस तथ्य की पुष्टि करता है कि कोई भी अन्य मायावी बल की सभी छियानवे मायाओं को नहीं जान सकता क्योंकि वे अत्यंत जटिल और पूर्णतः दुस्साध्य हैं। अतल लोक के निवासियों की समस्त भौतिक आवश्यकताएं और विलासिता के साधन इन्हीं मायावी शक्तियों के प्रभाव से स्वतः उत्पन्न और प्राप्त हो जाते हैं। बल असुर की यह मायावी शक्ति अतल लोक को एक अभेद्य और मायावी दुर्ग में परिवर्तित कर देती है।
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