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विस्तृत उत्तर
भगदत्त को वैष्णवास्त्र वंशानुगत रूप में प्राप्त हुआ था। भगवान विष्णु के वराह अवतार के समय यह अस्त्र पृथ्वी देवी को प्रदान किया गया था। कालांतर में पृथ्वी देवी से यह अस्त्र उनके पुत्र नरकासुर (भौमासुर) को प्राप्त हुआ और फिर नरकासुर से उसके पुत्र भगदत्त के अधिकार में आया। यह हस्तांतरण श्रृंखला दर्शाती है कि यद्यपि अस्त्र का मूल स्रोत भगवान विष्णु ही थे इसका ज्ञान और अधिकार वंशानुगत रूप से भी योग्य पात्रों को मिल सकता था।
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