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विस्तृत उत्तर
भागवत पुराण के परिप्रेक्ष्य में मय दानव की मानसिक स्थिति मिथ्या अहंकार से जुड़ी बताई गई है। शिव की कृपा से तलातल का राज्य और संरक्षण प्राप्त करने के बाद वह सुदर्शन चक्र के भय से मुक्त हो गया। इसका भावार्थ यह है कि दैवीय सुरक्षा के कारण उसके भीतर यह झूठा विश्वास उत्पन्न हो गया कि महादेव स्वयं उसके रक्षक हैं, इसलिए अब उसे परमेश्वर भगवान विष्णु के अजेय सुदर्शन चक्र से भी डरने की आवश्यकता नहीं है।
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