विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण के पंचम स्कंध के बीसवें अध्याय में इन द्वीपों के निवासियों के जीवन का वर्णन किया गया है। इन सभी द्वीपों में रहने वाले लोग पूर्णतः स्वर्गिक जीवन व्यतीत करते हैं जहाँ बुढ़ापा, रोग और मानसिक कष्ट नहीं होते। वे मानसिक दृढ़ता और शारीरिक शक्ति में पूर्णता प्राप्त होते हैं और स्वर्ग के द्वार पर वैदिक अनुष्ठान करते हैं। प्लक्ष द्वीप के निवासी 1000 वर्षों तक देवताओं के समान जीवन जीते हैं। प्रत्येक द्वीप में अपने विशिष्ट वर्ण (जाति) होती हैं जो विभिन्न देवताओं की उपासना करती हैं। परंतु यह स्वर्गिक जीवन भी अस्थायी है क्योंकि इन द्वीपों के निवासियों को अपने पुण्य क्षीण होने पर पुनः कर्मानुसार अन्य योनियों या भारतवर्ष में जन्म लेना पड़ता है क्योंकि ये विशुद्ध कर्मभूमियाँ नहीं बल्कि केवल पूर्व पुण्यों को भोगने की भोगभूमियाँ हैं।
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