विस्तृत उत्तर
भगवान वामन ने राजा बलि को सुतल लोक इसलिए दिया क्योंकि बलि ने विपत्ति, बंधन और अपमान की स्थिति में भी अपना सत्य और दान-वचन नहीं छोड़ा। जब भगवान वामन ने त्रिविक्रम रूप धारण कर पहले पग में संपूर्ण पृथ्वी और अधोलोकों को तथा दूसरे पग में संपूर्ण ऊर्ध्व लोकों को नाप लिया, तब तीसरे पग के लिए स्थान शेष नहीं था। वचन पूरा न हो पाने पर गरुड़ ने बलि को वरुण-पाश में बाँध दिया। इस घोर स्थिति में भी बलि विचलित नहीं हुए और उन्होंने कहा कि उनका शरीर और सिर अभी शेष है, इसलिए भगवान तीसरा पग उनके सिर पर रखें ताकि उनका वचन झूठा न हो। बलि के इस पूर्ण आत्म-समर्पण से भगवान वामन अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने बलि को मुक्त किया, सुतल लोक का अखंड राज्य दिया और घोषणा की कि सुतल लोक देवताओं के स्वर्ग से भी अधिक समृद्ध होगा तथा वहाँ बलि को मानसिक या शारीरिक व्याधि नहीं होगी।
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