विस्तृत उत्तर
भगवान वामन ने रावण का घमंड केवल अपने वाम चरण के अंगूठे से तोड़ा। रावण जब सुतल लोक में बलपूर्वक प्रवेश करने लगा, तो भगवान वामन ने उसे रोक दिया। रावण ने उन्हें साधारण बौना द्वारपाल समझकर युद्ध के लिए ललकारा या हटाने की धृष्टता की। तब भगवान वामन ने न कोई अस्त्र उठाया और न भयंकर रूप धारण किया। उन्होंने केवल अपने वाम चरण का अंगूठा उठाकर रावण को हल्की सी ठोकर मारी। उस अंगूठे के प्रहार में इतना असीमित ब्रह्मांडीय बल था कि रावण सुतल लोक के द्वार से उछलकर एक करोड़ योजन दूर अपनी लंका में जा गिरा। इसके बाद रावण ने कभी सुतल लोक की ओर आँख उठाकर देखने का साहस नहीं किया।
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