विस्तृत उत्तर
भगवान वराह रसातल इसलिए गए क्योंकि हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को रसातल की घोर गहराइयों में छिपा दिया था। पृथ्वी ब्रह्मांडीय जल और रसातल के कीचड़ में डूबने लगी और उसने भगवान नारायण की स्तुति की। पृथ्वी की करुण पुकार सुनकर भगवान विष्णु ने विशाल पर्वताकार शूकर, यानी वराह, का रूप धारण किया। उन्होंने ब्रह्मांडीय जल को चीरते हुए रसातल की असीम गहराइयों में प्रवेश किया, अपनी तीक्ष्ण घ्राण शक्ति से पृथ्वी का पता लगाया, हिरण्याक्ष और दैत्य सैनिकों का सामना किया, और अंततः पृथ्वी को अपने दांतों पर उठाकर ऊपर स्थापित किया।
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