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विस्तृत उत्तर
भगवान विष्णु का सृष्टि-संकल्प वह दिव्य इच्छा है जिसके कारण अव्यक्त जगत फिर प्रकट होने लगता है। कथा में इसे 'एकोऽहं बहुस्याम' की भावना से समझाया गया है, यानी एक परम चेतना अनेक रूपों में प्रकट होना चाहती है। इसी संकल्प से पहला स्पंदन उठा, फिर आदिनाद प्रकट हुआ। आगे प्रथम श्वास ने उसी सृजन-संकल्प को गति देकर ब्रह्मांड का विस्तार शुरू किया।
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