विस्तृत उत्तर
शास्त्रों में काल भैरव की पूजा दो भिन्न मार्गों से वर्णित है:
- 1राजसिक (या सौम्य) सिद्धि
- 2तामसिक (या उग्र) सिद्धि
गृहस्थ साधकों के लिए केवल राजसिक या सौम्य साधना ही उचित है। उग्र तांत्रिक साधना केवल गुरु-निर्देशन में ही की जानी चाहिए।
भैरव साधना के दो मार्ग हैं: (1) राजसिक/सौम्य सिद्धि — गृहस्थों के लिए उचित, (2) तामसिक/उग्र सिद्धि — केवल गुरु-निर्देशन में।
शास्त्रों में काल भैरव की पूजा दो भिन्न मार्गों से वर्णित है:
गृहस्थ साधकों के लिए केवल राजसिक या सौम्य साधना ही उचित है। उग्र तांत्रिक साधना केवल गुरु-निर्देशन में ही की जानी चाहिए।
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