विस्तृत उत्तर
विभिन्न पुराण इस संबंध को अलग-अलग दृष्टियों से देखते हैं:
केवल मानस पुत्री के रूप में: ब्रह्म पुराण, पद्म पुराण, ब्रह्मांड पुराण।
केवल ब्रह्मा की पत्नी (Consort) के रूप में: ब्रह्म वैवर्त पुराण, देवी भागवत पुराण, ललितोपाख्यान।
पुत्री और पत्नी दोनों रूपों में: केवल मत्स्य पुराण और भागवत पुराण में।
मत्स्य पुराण के तीसरे अध्याय के अनुसार, जब ब्रह्मा ने ब्रह्मांड की रचना करने का विचार किया, तो उन्होंने गहरा ध्यान (तप) किया। उस तप की ऊर्जा से उनका अपना शरीर दो भागों (नर और नारी) में विभक्त हो गया। वह स्त्री अंश ही 'शतरूपा', 'गायत्री' या 'सरस्वती' के रूप में प्रकट हुआ। चूँकि वह ब्रह्मा के ही मन और अंश से जन्मी थीं, अतः उन्हें ब्रह्मा की 'मानस पुत्री' (Mind-born daughter) कहा गया।





