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विस्तृत उत्तर
ब्रह्मा जी की काया से उत्पन्न होने के कारण वे कायस्थ कहलाए। गुप्त रूप से सभी जीवों के चित्र, अर्थात उनके कर्मों का स्वरूप, संचित करने के कारण उनका नाम चित्रगुप्त पड़ा। वे प्रत्येक जीव के जीवन का सूक्ष्म कर्म-वृत्तांत सुरक्षित रखते हैं। उनकी अग्रसंधानी नामक अलौकिक पंजिका में ब्रह्मांड के प्रत्येक प्राणी के जन्म से लेकर मृत्यु तक के एक-एक क्षण का शुभ और अशुभ कर्म अंकित रहता है।
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