विस्तृत उत्तर
चित्रगुप्त जीवात्मा के कर्मों का सटीक, त्रुटिहीन और सूक्ष्म लेखा-जोखा रखने वाले देवता हैं। गरुड़ पुराण और अन्य स्मृति ग्रंथों में उनके जन्म और स्वरूप का विस्तृत आख्यान मिलता है। उन्हें 'कायस्थ' कहा गया है, जिसका अर्थ है वह जो काया अर्थात शरीर में स्थित हो। वे 'अग्रसंधानी' नामक अलौकिक पंजिका रखते हैं, जिसमें ब्रह्मांड के प्रत्येक प्राणी के जन्म से लेकर मृत्यु तक के एक-एक क्षण का शुभ और अशुभ कर्म अंकित रहता है। यमराज के सम्मुख जीवात्मा प्रस्तुत होने पर चित्रगुप्त यही कर्म-वृत्तांत पढ़ते हैं और उसी के आधार पर यमराज निर्णय देते हैं।
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