विस्तृत उत्तर
चित्रगुप्त के लेखे से कोई जीव इसलिए बच नहीं सकता क्योंकि उनका न्याय-कौशल अचूक है और वे अग्रसंधानी नामक अलौकिक पंजिका में प्रत्येक जीव के जन्म से मृत्यु तक के एक-एक क्षण का शुभ और अशुभ कर्म अंकित रखते हैं। इस प्रक्रिया में कोई मानवीय न्यायालय जैसी बहस, सिफारिश, घूस या वकील की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि चित्रगुप्त का लेखा-जोखा स्वयं में अंतिम और अकाट्य साक्ष्य होता है। इसके अतिरिक्त श्रवण और श्रवणी देव मनुष्य के गुप्त से गुप्त कर्मों को भी उसी क्षण देख और सुन लेते हैं और उन्हें चित्रगुप्त की पंजिका तक पहुंचाते हैं।
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