विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में वर्णन आता है कि यमराज ने विचार किया कि यदि उनकी पुरी में कोई ऐसा मेधावी लेखक हो जाए जो सभी जीवों के शुभ-अशुभ कर्मों का ज्ञाता हो, तो उनका कार्य सिद्ध हो जाएगा और वे चिंतामुक्त हो जाएंगे। यमराज की इसी आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए ब्रह्मा जी ने १००० वर्षों तक घोर तपस्या की। इस तपस्या के परिणामस्वरूप उनके शरीर, यानी काया, से एक अत्यंत तेजस्वी पुरुष प्रकट हुआ, जिसके हाथों में कलम, दवात और करवाल अर्थात तलवार थी। ब्रह्मा जी की काया से उत्पन्न होने के कारण वे कायस्थ कहलाए और गुप्त रूप से सभी जीवों के चित्र अर्थात कर्मों का स्वरूप संचित करने के कारण उनका नाम चित्रगुप्त पड़ा।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





