विस्तृत उत्तर
हिंदू पौराणिक कथाओं में भूतों की दो श्रेणियाँ बताई गई हैं। पहली श्रेणी दैवीय भूतों की है। ये वे गण हैं जिनकी रचना स्वयं देवताओं ने की है, जैसे भगवान शिव के पार्षद नंदी, भृंगी और भूतगण। ये ब्रह्मांडीय संतुलन बनाए रखने और देवताओं की आज्ञा का पालन करने का कार्य करते हैं। दूसरी श्रेणी मानवीय भूतों की है। ये वे आत्माएं हैं जो मनुष्यों की मृत्यु के उपरांत अशुद्ध परिस्थितियों या तीव्र वासनाओं के कारण भूत बन जाती हैं। दैवीय भूत देव-आज्ञापालक और संतुलनकारी हैं, जबकि मानवीय भूत आसक्ति, हिंसक मृत्यु या अधूरी इच्छाओं से बंधे होते हैं।
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