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विस्तृत उत्तर
वेदों, शास्त्रों, गुरु और देवताओं की निंदा करने वाले, पाखंडी आचरण करने वाले, और सब तीर्थों में अनुचित दान ग्रहण करने वाले पिशाच योनि में गिरते हैं। धर्म का अपमान जीव को सत्य, संयम और शुद्ध आचरण से दूर कर देता है। पिशाच योनि अत्यंत मलिन, तामसिक और नकारात्मक मानी गई है। इसलिए जो मनुष्य धर्म, वेद, गुरु और देवताओं की निंदा करके पाखंडपूर्ण जीवन जीता है, वह अपने सूक्ष्म शरीर में तामसिक संस्कार संचित कर मृत्यु के बाद पिशाच योनि को प्राप्त होता है।
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