विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण में महर्षि पराशर बताते हैं कि जो व्यक्ति स्त्रियों का गर्भपात करवाता है, वह घोर यातनाओं के बाद प्रेत योनि प्राप्त करता है। कर्म-विपाक के प्रसंग में यह भी बताया गया है कि स्त्री की हत्या करने वाला या गर्भपात करने वाला भील या रोगी होता है। निष्कर्ष में भी स्पष्ट किया गया है कि धर्म से च्युति और महापातक जीवात्मा को भयंकर नरकों और तदुपरांत पिशाच या राक्षस जैसी योनियों में धकेलते हैं। गर्भपात करवाना जीव के विरुद्ध गंभीर पाप माना गया है, जिसका फल पारलौकिक और पुनर्जन्मगत दोनों रूपों में भोगना पड़ता है।
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