विस्तृत उत्तर
हाटकी नदी सामान्य नदी इसलिए नहीं है क्योंकि यह जल की साधारण धारा नहीं, बल्कि विशुद्ध ब्रह्मांडीय ऊर्जा, अग्नि और शिव-शक्ति के तेज का द्रवीभूत रूप है। भगवान शिव और माता भवानी के दिव्य मिलन के परिणामस्वरूप उनके वीर्य और शक्ति के स्राव से यह महान तेजस्विनी नदी उत्पन्न होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि यह जल से अधिक शक्तिशाली और अग्नि से अधिक जीवंत है। जब वायुदेव द्वारा प्रज्वलित अग्निदेव इस नदी के तेज का पान करते हैं और उसे पचा नहीं पाते, तब वे उसे बाहर उगलते हैं, और वही घनीभूत तेज हाटक नामक दिव्य स्वर्ण में बदल जाता है।
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