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विस्तृत उत्तर
हिरण्यपुर रसातल के जल के भीतर स्थित स्वर्णमयी, अजेय और मायावी नगरी थी। यह निवातकवचों और कालेयों का निवास स्थान था। अर्जुन जब मातलि के रथ पर रसातल पहुँचे, तो उन्होंने दैत्यों के इस अद्भुत, मायावी और सर्वसुविधा संपन्न नगर को देखा। हिरण्यपुर चार विशाल द्वारों और गगनचुंबी अट्टालिकाओं से युक्त था। यह नगर रत्नों, स्फटिकों और अद्भुत वृक्षों से सुशोभित था, जहाँ असुर आनंदपूर्वक निवास कर रहे थे। इसे स्वयं मय दानव या ब्रह्मा द्वारा निर्मित बताया गया है।
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