विस्तृत उत्तर
इलावृत वर्ष जम्बूद्वीप का बिल्कुल मध्य भाग है जहाँ सुमेरु पर्वत स्थित है। श्रीमद्भागवत के अनुसार इस वर्ष में साक्षात् भगवान शिव ही एकमात्र पुरुष हैं। देवी भवानी (दुर्गा) के एक प्राचीन शाप के कारण यहाँ प्रवेश करने वाला कोई भी अन्य पुरुष तुरंत स्त्री रूप में परिवर्तित हो जाता है। भगवान शिव यहाँ करोड़ों दासियों से घिरे रहते हैं और वे स्वयं चतुर्व्यूह के चतुर्थ अंश 'संकर्षण' की अत्यंत भावपूर्ण स्तुति और उपासना करते हैं। यह देवी भवानी का शाप और इलावृत वर्ष की यह विशेषता उसे अन्य सभी वर्षों से सर्वथा विलक्षण बनाती है। इस वर्ष में भगवान शिव की एकमात्र पुरुष के रूप में उपस्थिति यह भी दर्शाती है कि यह क्षेत्र शिव और शक्ति का परम संयुक्त आवास है।
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