विस्तृत उत्तर
जलाभिषेक की विधि शिव पुराण और आगम शास्त्रों में विस्तार से वर्णित है।
जलाभिषेक की चरणबद्ध विधि
1शुद्धि एवं तैयारी
- ▸स्नान करके स्वच्छ वस्त्र (श्वेत या पीत) पहनें
- ▸पूजा-स्थल को शुद्ध जल से धोएँ
- ▸आचमन करें (तीन बार जल लेकर 'ॐ केशवाय नमः' आदि)
2संकल्प
- ▸बाएँ हाथ में जल लेकर दाएँ हाथ से ढककर संकल्प करें
- ▸'ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः... अहं शिवप्रीतये जलाभिषेकं करिष्ये।'
3पंचोपचार अर्पण
- ▸गणपति पूजन करें
- ▸शिवलिंग पर गंगाजल (या शुद्ध जल) अर्पित करें
4जल-अर्पण
- ▸ताँबे या चाँदी के लोटे में जल भरें
- ▸धीरे-धीरे शिवलिंग के ऊपर जल प्रवाहित करें
- ▸'ॐ नमः शिवाय' या 'ॐ नमो भगवते रुद्राय' का जप करते रहें
- ▸जल की धारा अखंड रखें
5बिल्वपत्र, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य
- ▸जलाभिषेक के बाद बिल्वपत्र अवश्य चढ़ाएँ
- ▸अंत में आरती और परिक्रमा
आगम शास्त्र का निर्देश: जल की धारा शिवलिंग के ऊपर से निरंतर प्रवाहित होनी चाहिए — रुकनी नहीं चाहिए।





