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विस्तृत उत्तर
जनलोक पृथ्वी और स्वर्ग से अलग है क्योंकि पृथ्वी कर्मभूमि है और स्वर्गलोक भोगभूमि है, जबकि जनलोक विशुद्ध ज्ञानभूमि और ब्रह्म-चिंतन की तपोभूमि है। स्वर्गलोक तक सकाम कर्मों का फल प्राप्त होता है और पुण्य क्षीण होने पर आत्मा को नीचे लौटना पड़ता है। जनलोक अकृतक लोक है, जो प्रलय की अग्नि से अछूता रहता है। यहाँ भौतिक भोग-विलास या इंद्रियतृप्ति का स्थान नहीं है; यहाँ का मुख्य सुख ब्रह्मानंद है।
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