ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
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जप सावधानी📜 मंत्र महोदधि, कुलार्णव तंत्र, पतंजलि योगसूत्र, तंत्र शास्त्र — शारदा तिलक3 मिनट पठन

जप करते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

जप में सावधानियाँ: शुद्ध उच्चारण करें, रीढ़ सीधी रखें, जप बीच में न रोकें, माला किसी को न दें, जप की संख्या गोपनीय रखें। जप काल में मांसाहार और तामसी भोजन वर्जित। यांत्रिक जप से बचें — प्रत्येक मंत्र में देवता का भाव रखें।

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विस्तृत उत्तर

जप करते समय सावधानियाँ तंत्र शास्त्र और मंत्र महोदधि में विस्तार से वर्णित हैं:

उच्चारण सावधानियाँ

  1. 1शुद्ध उच्चारण अनिवार्य:

मंत्र महोदधि में कहा गया है — 'मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जगत्पते। यत् पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे।' — अशुद्ध उच्चारण से मंत्र का उल्टा फल भी हो सकता है।

  1. 1दीर्घ-हृस्व का ध्यान:
ॐ नमः शिवाय' में 'शि' हृस्व है, 'वा' दीर्घ है। गलत उच्चारण से मंत्र की शक्ति कम होती है।
  1. 1अनुस्वार (बिंदु) का उच्चारण:
गं', 'हं', 'क्रीं' में अनुस्वार अत्यंत महत्वपूर्ण है — इसे न छोड़ें।

मानसिक सावधानियाँ

  1. 1एकाग्रता बनाए रखें:

मन के भटकने पर जबरदस्ती वापस लाएं। शुरुआत में 5 मिनट की एकाग्रता भी पर्याप्त है।

  1. 1जप में यांत्रिकता न आने दें:
माला पूरी करनी है' — यह भाव छोड़ें। प्रत्येक मंत्र में देवता का भाव रखें।
  1. 1जप के समय अन्य विचार:

जप काल में सांसारिक योजनाएं, चिंताएं मन में न आने दें।

शारीरिक सावधानियाँ

  1. 1झुककर न बैठें:

रीढ़ सीधी रखें — झुकने से श्वास अनियमित होती है और एकाग्रता टूटती है।

  1. 1आँखें:

प्रारंभ में अर्धबंद या बंद आँखें रखें। इधर-उधर न देखें।

  1. 1जप के बीच न उठें:

जप बीच में न रोकें — यदि रोकना ही पड़े तो माला को सिर से लगाएं और 'ॐ' कहें।

आचरण सावधानियाँ

  1. 1जप के बाद:
  • जप की संख्या किसी को न बताएं — गोपनीयता शक्ति बनाए रखती है
  • जप के तुरंत बाद उठकर दुनियादारी में न लगें — थोड़ा मौन रखें
  1. 1माला की सावधानी:
  • माला दूसरों को न दें, न उन्हें छूने दें
  • टूटी माला से जप न करें
  • माला को शौचालय के पास न ले जाएं
  1. 1आहार:

जप से पूर्व मांस, मदिरा, अत्यधिक तीखा-तामसी भोजन न करें।

जप के दस दोष (मंत्र महोदधि से)

अचेतस्, अशुचिस्, अनाहार्य, अभक्ष्य, अविनीत, अनुच्चारित, अविहित, अदेश, अकाल, अमात्र' — ये दस दोष जप को निष्फल बनाते हैं अर्थात् बिना श्रद्धा, बिना शुद्धि, गलत भोजन, गलत स्थान, गलत समय और गलत संख्या से किया जप फलदायी नहीं होता।
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शास्त्रीय स्रोत
मंत्र महोदधि, कुलार्णव तंत्र, पतंजलि योगसूत्र, तंत्र शास्त्र — शारदा तिलक
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