विस्तृत उत्तर
जप करते समय सावधानियाँ तंत्र शास्त्र और मंत्र महोदधि में विस्तार से वर्णित हैं:
उच्चारण सावधानियाँ
- 1शुद्ध उच्चारण अनिवार्य:
मंत्र महोदधि में कहा गया है — 'मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जगत्पते। यत् पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे।' — अशुद्ध उच्चारण से मंत्र का उल्टा फल भी हो सकता है।
- 1दीर्घ-हृस्व का ध्यान:
ॐ नमः शिवाय' में 'शि' हृस्व है, 'वा' दीर्घ है। गलत उच्चारण से मंत्र की शक्ति कम होती है।
- 1अनुस्वार (बिंदु) का उच्चारण:
गं', 'हं', 'क्रीं' में अनुस्वार अत्यंत महत्वपूर्ण है — इसे न छोड़ें।
मानसिक सावधानियाँ
- 1एकाग्रता बनाए रखें:
मन के भटकने पर जबरदस्ती वापस लाएं। शुरुआत में 5 मिनट की एकाग्रता भी पर्याप्त है।
- 1जप में यांत्रिकता न आने दें:
माला पूरी करनी है' — यह भाव छोड़ें। प्रत्येक मंत्र में देवता का भाव रखें।
- 1जप के समय अन्य विचार:
जप काल में सांसारिक योजनाएं, चिंताएं मन में न आने दें।
शारीरिक सावधानियाँ
- 1झुककर न बैठें:
रीढ़ सीधी रखें — झुकने से श्वास अनियमित होती है और एकाग्रता टूटती है।
- 1आँखें:
प्रारंभ में अर्धबंद या बंद आँखें रखें। इधर-उधर न देखें।
- 1जप के बीच न उठें:
जप बीच में न रोकें — यदि रोकना ही पड़े तो माला को सिर से लगाएं और 'ॐ' कहें।
आचरण सावधानियाँ
- 1जप के बाद:
- ▸जप की संख्या किसी को न बताएं — गोपनीयता शक्ति बनाए रखती है
- ▸जप के तुरंत बाद उठकर दुनियादारी में न लगें — थोड़ा मौन रखें
- 1माला की सावधानी:
- ▸माला दूसरों को न दें, न उन्हें छूने दें
- ▸टूटी माला से जप न करें
- ▸माला को शौचालय के पास न ले जाएं
- 1आहार:
जप से पूर्व मांस, मदिरा, अत्यधिक तीखा-तामसी भोजन न करें।
जप के दस दोष (मंत्र महोदधि से)
अचेतस्, अशुचिस्, अनाहार्य, अभक्ष्य, अविनीत, अनुच्चारित, अविहित, अदेश, अकाल, अमात्र' — ये दस दोष जप को निष्फल बनाते हैं अर्थात् बिना श्रद्धा, बिना शुद्धि, गलत भोजन, गलत स्थान, गलत समय और गलत संख्या से किया जप फलदायी नहीं होता।





