विस्तृत उत्तर
हां — हिंदी उच्चारण से भी प्रभाव:
संस्कृत श्रेष्ठ (शास्त्रीय)
- ▸मंत्र = ध्वनि विज्ञान। संस्कृत स्वर/व्यंजन = विशिष्ट कंपन → शरीर/मस्तिष्क प्रभाव।
- ▸शुद्ध संस्कृत = 100% ध्वनि शक्ति।
हिंदी मान्य (भक्ति दृष्टि)
- ▸'भगवान भाव के भूखे हैं, भाषा के नहीं।'
- ▸हिंदी उच्चारण = ~80-90% ध्वनि (हिंदी संस्कृत से निकली — अधिकांश ध्वनि समान)।
- ▸श्री सूक्त, सप्तशती — हिंदी अनुवाद पाठ भी अनेक विद्वान मान्य करते हैं।
- ▸BhaktVatsal/AajTak शोध: 'हिंदी में भी पढ़ सकते हैं।'
सर्वोत्तम: संस्कृत सीखने का प्रयास करें। तब तक हिंदी से आरंभ — भक्ति भाव प्रधान।
सार: संस्कृत > हिंदी (ध्वनि शक्ति)। किन्तु हिंदी + भक्ति > संस्कृत बिना भक्ति। 'भाव भूखे, भाषा नहीं।'





