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विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण में महर्षि पराशर बताते हैं कि कूटसाक्ष्य, अर्थात झूठी गवाही देने वाला, घोर दंड का अधिकारी होता है। ऐसे व्यक्ति घोर यातनाओं के बाद प्रेत योनि प्राप्त करते हैं। पिशाच योनि के कारणों में भी झूठी गवाही का उल्लेख है—जो लोग झूठी गवाही देकर निर्दोषों को दंडित करवाते हैं, वे बारंबार पिशाच योनि में जन्म लेते हैं। इसलिए झूठी गवाही शास्त्रों में अत्यंत गंभीर पाप मानी गई है, जो जीव को प्रेत या पिशाच जैसी तामसिक योनियों की ओर धकेलती है।
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