दैनिक कर्मनया कार्य शुरू करने से पहले कौन सा मंत्र बोलेंनया कार्य शुरू करने से पहले: गणेश वन्दना — 'वक्रतुण्ड महाकाय... निर्विघ्नं कुरु मे देव'। बीज मंत्र: 'ॐ गं गणपतये नमः' (11/21 बार)। ज्ञान कार्य हेतु सरस्वती वन्दना। ऋग्वेद: 'ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे'। गणेश प्रथम पूज्य — सभी शुभ कार्य उनकी वन्दना से आरम्भ होते हैं।#शुभारम्भ#गणेश#विघ्न निवारण
दैनिक कर्मसूर्य को जल देने की विधि और मंत्र क्या हैतांबे के लोटे में जल + लाल फूल + लाल चन्दन + कुमकुम + अक्षत। सूर्योदय के समय पूर्व दिशा में मुख कर 'ॐ सूर्याय नमः' या 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' बोलते हुए जल अर्पित करें। गायत्री मंत्र भी जप सकते हैं। नियमित समय पर करें, बासी जल न चढ़ाएँ।#सूर्य अर्घ्य#जल अर्पण#सूर्य मंत्र
दैनिक कर्मभोजन से पहले कौन सा मंत्र बोलना चाहिएभोजन से पहले: (1) गीता 4.24: 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्महविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्' (2) उपनिषद: 'ॐ सह नाववतु सह नौ भुनक्तु' (3) 'अन्नब्रह्मा रसो विष्णुः भोक्ता देवो महेश्वरः' (4) अन्नपूर्णा स्तोत्र। पूर्व/उत्तर दिशा में मुख कर भूमि पर बैठकर भोजन करें।#भोजन मंत्र#ब्रह्मार्पणम्#अन्नपूर्णा
दैनिक कर्मयात्रा से पहले कौन सा मंत्र बोलेंयात्रा से पहले: (1) गणेश मंत्र — 'वक्रतुण्ड महाकाय... निर्विघ्नं कुरु मे देव' (2) विष्णु स्मरण — 'मंगलं भगवान् विष्णुः' (3) हनुमान स्मरण। 'ॐ गं गणपतये नमः' 11 बार जपें। इष्टदेव को प्रणाम, दही-शक्कर, दाहिना पैर पहले — परम्परागत शुभ विधान।#यात्रा मंत्र#गणेश#सुरक्षा
दैनिक कर्मसूर्य को जल देने की विधि — मंत्र?सूर्योदय, तांबा लोटा(जल+रोली+फूल), पूर्व मुख, खड़े, 'ॐ सूर्याय नमः' 11 बार, धीरे जल गिराएँ(इंद्रधनुष)। लाभ: स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, विटामिन D।#सूर्य अर्घ्य#जल#विधि