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विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के अनुसार उपवास, पशु के आक्रमण, अग्नि, श्राप, हैजा या किसी महामारी, आत्महत्या, ऊँचाई से गिरने, डूबने, सर्पदंश, बिजली गिरने या हत्या के कारण हुई मृत्यु अकाल मृत्यु मानी जाती है। ऐसी मृत्यु सामान्य मृत्यु से भिन्न मानी गई है और ऐसी आत्मा को प्रेत योनि के कष्टों से मुक्त करने के लिए नारायण बलि का विधान बताया गया है।
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