विस्तृत उत्तर
ब्रह्माण्ड पुराण महर्लोक के निवासियों की आध्यात्मिक विशेषताओं का अत्यंत स्पष्ट और स्तुत्य वर्णन करता है। इन महर्षियों का आध्यात्मिक तेज और प्रभाव साक्षात् सृष्टिकर्ता ब्रह्मा के समान होता है। ये ऋषि पाँच महान आध्यात्मिक ऐश्वर्यों से परिपूर्ण होते हैं जो इस प्रकार हैं — पहला विजय (Vijaya): काम, क्रोध, लोभ जैसी वृत्तियों, अज्ञान और काल के प्रभाव पर पूर्ण विजय। दूसरा ऐश्वर्य (Aishvarya): अणिमा, महिमा, गरिमा आदि अष्ट-सिद्धियों से युक्त असीम दैवीय क्षमताएँ। तीसरा स्थिति (Sthiti): बिना किसी विक्षेप या विचलन के एक ही स्थिर अवस्था में सम्पूर्ण कल्प के अंत तक ध्यान-मग्न स्थित रहना। चौथा वैराग्य (Vairagya): सम्पूर्ण भौतिक पदार्थों और स्वर्ग के प्रलोभनों से भी पूर्ण विरक्ति। पाँचवाँ दर्शन (Darshana): परब्रह्म परमात्मा का प्रत्यक्ष, स्पष्ट और निर्बाध विज़न (Vision)।
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