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विस्तृत उत्तर
महत् तत्त्व को सृष्टि की प्रथम ब्रह्मांडीय बुद्धि या रचनात्मक चेतना समझा जा सकता है। जब भगवान की इच्छा शक्ति, ज्ञान शक्ति और क्रिया शक्ति सक्रिय होती हैं, तब अव्यक्त प्रकृति में व्यवस्था का उदय होता है। यही व्यवस्था महत् तत्त्व के रूप में समझाई गई है। आगे इसी से अहंकार, भेद और स्थूल सृष्टि की रचना का क्रम चलता है।
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