विस्तृत उत्तर
महातल लोक को बिल-स्वर्ग इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह भूमिगत अधोलोक होते हुए भी नरक नहीं, बल्कि स्वर्ग से भी अधिक भौतिक सुख-संपदा और विलासिता वाला लोक है। पुराणों में सातों पातालों को बिल-स्वर्ग कहा गया है। महातल सहित इन लोकों के निवासियों को स्वर्ग के देवताओं से भी अधिक भौतिक सुख, संपदा, विलासिता और ऐश्वर्य उपलब्ध है। महातल में नागों की मणियों का प्रकाश, मणि-जटित महल, स्वर्ण और रत्नों से बने परकोटे, सुंदर उद्यान, सरोवर, कमल, सुगंधित वातावरण, रोग-रहित दीर्घायु और अद्भुत ऐश्वर्य मिलता है। इसलिए यह नरक नहीं, बल्कि भूमिगत स्वर्ग जैसा लोक है।
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