विस्तृत उत्तर
महातल लोक में भौतिक सुख जीवों के सकाम पुण्यों के फलस्वरूप मिलता है। जिन जीवों ने पृथ्वी पर रहते हुए घोर तपस्या, दान-पुण्य, बड़े यज्ञ और भारी भौतिक उपलब्धियाँ की हों, पर ईश्वर भक्ति और वैराग्य का अभाव रखा हो, उन्हें महातल जैसे बिल-स्वर्गों में जन्म मिल सकता है। वहाँ उन्हें स्वर्ग से भी श्रेष्ठ भौतिक सुख, अतुलनीय ऐश्वर्य, मणि-रत्न, सुंदर महल, रोग-रहित दीर्घायु और दिव्य रसायनों से समर्थ शरीर प्राप्त होता है। पर ईश्वर-विमुखता और अहंकार के कारण वे गरुड़ जैसी ईश्वरीय शक्ति से भयभीत रहते हैं।
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