विस्तृत उत्तर
महातल लोक से यह सीख मिलती है कि भौतिक सुख, संपत्ति, परिवार और शक्ति होने पर भी ईश्वरीय शरणागति के बिना भय समाप्त नहीं होता। महातल के नाग अत्यंत शक्तिशाली हैं, मणि-रत्नों और भौतिक ऐश्वर्य से संपन्न हैं, परिवार के साथ भोग-विलास करते हैं और दिव्य रसायनों से युवा तथा निरोग रहते हैं। फिर भी वे गरुड़ से सदैव भयभीत हैं। शास्त्रों का संकेत है कि यदि जीव क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या और भौतिक आसक्ति में बंधा है, तो साक्षात् काल या मृत्यु का भय उसे सताता रहेगा। इसलिए महातल भौतिक ऐश्वर्य और आध्यात्मिक शरणागति के अंतर को स्पष्ट करता है।
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