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विस्तृत उत्तर
महातल में कपिल मुनि अपने आश्रम में गहन समाधि में लीन मिले। सगर पुत्र यज्ञ-अश्व की खोज करते हुए महातल तक पहुँचे। वहाँ उन्होंने देखा कि परब्रह्म भगवान विष्णु के अंशावतार और सांख्य योग के प्रणेता महर्षि कपिल गहन समाधि में लीन हैं। उनके आश्रम के समीप ही यज्ञ का अश्व बंधा हुआ था। अहंकार और अज्ञानता के कारण सगर पुत्रों ने कपिल मुनि को ही चोर समझ लिया।
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