विस्तृत उत्तर
दार्शनिक अर्थ में, कोई भी मंत्र 'साक्षी मंत्र' बन सकता है, यदि उसका जाप साक्षी भाव में स्थित होकर किया जाए।
जब साधक मंत्र पर ध्यान केंद्रित करता है, तो वह मन में उठने वाले विचारों और भावनाओं का दृष्टा बन जाता है।
मंत्र एक लंगर का कार्य करता है, जो मन को विचारों के प्रवाह में बहने से रोकता है और साधक को अपने सच्चे 'साक्षी स्वरूप' में स्थित होने में सहायता करता है।





