विस्तृत उत्तर
मंत्र-साधना वह दिव्य सेतु है जो भक्त (जीव) को ब्रह्मांडीय व्यवस्था (जगत) से जोड़ता है और अंततः परब्रह्म में विलीन कर देता है।
यही साधना हमारे चित्त को शुद्ध करती है और अंततः हमें उपनिषदों के उस परम सत्य की ओर ले जाती है — कि हमारा वास्तविक स्वरूप वह नित्य, शुद्ध, बुद्ध, मुक्त 'साक्षी आत्मा' ही है।
यही वह मार्ग है जो कर्म-बंधन से संचालित जीवन को एक सचेत, धार्मिक और आनंदपूर्ण जीवन में रूपांतरित करता है।





