विस्तृत उत्तर
भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने के विषय में शास्त्रों में स्पष्ट मार्गदर्शन है:
भागवत पुराण (11.2.37) — शुद्ध भक्ति का फल
भक्त्या मामभिजानाति यावान्यश्चास्मि तत्त्वतः।' — (गीता 18.55) भक्ति से ही भगवान को जाना जा सकता है और उनका अनुग्रह प्राप्त होता है।
आशीर्वाद प्राप्ति के शास्त्रोक्त उपाय
1साष्टांग प्रणाम
अग्निपुराण: मंदिर में प्रवेश पर और दर्शन के बाद साष्टांग दण्डवत प्रणाम करें — आठ अंगों से भूमि स्पर्श (दोनों पाँव, दोनों घुटने, दोनों हाथ, वक्षस्थल, मस्तक)। यह समर्पण का सर्वोच्च भाव है।
2शुद्ध भाव से दर्शन
पद्म पुराण: 'दर्शनं देवदेवस्य स्पर्शनं पापनाशनम्।' — देवता के दर्शन मात्र से पाप नष्ट होते हैं, परंतु दर्शन श्रद्धा और एकाग्रता से होने चाहिए।
3प्रदक्षिणा (परिक्रमा)
विष्णु पुराण: प्रदक्षिणा का भाव यह है — 'भगवान सृष्टि के केंद्र हैं और मैं उनके इर्द-गिर्द परिक्रमा करता हूँ।' यथाशक्ति 3, 7, या 108 प्रदक्षिणा करें।
4मानसिक समर्पण
भगवद्गीता (9.27): 'यत्करोषि यदश्नासि यज्जुहोषि ददासि यत् — तत्कुरुष्व मदर्पणम्।' — सभी कर्म भगवान को अर्पित करें।
5संतों-पुजारियों का आशीर्वाद
शास्त्र कहते हैं — भगवान के सेवकों (पुजारियों और संतों) का आशीर्वाद भी दैवी अनुग्रह का माध्यम है।
6प्रसाद ग्रहण
प्रसाद भगवान का शेष (उच्छिष्ट) होता है — इसे श्रद्धापूर्वक ग्रहण करने से दिव्य कृपा प्राप्त होती है।
सत्य यह है
शास्त्रों के अनुसार आशीर्वाद बाहर से नहीं आता — भक्त के हृदय की शुद्धता और समर्पण ही ईश्वरीय कृपा का द्वार खोलता है।





