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मंत्र अर्थ⏱ 2 मिनट पठन

मंत्र जप का अर्थ क्या होता है?

मंत्र जप का अर्थ: 'मन्' (मनन) + 'त्र' (रक्षा) = जो मनन से रक्षा करे। जप = देवता का निरंतर स्मरण।

संक्षिप्त उत्तर

मंत्र जप का अर्थ: 'मन्' (मनन) + 'त्र' (रक्षा) = जो मनन से रक्षा करे। जप = देवता का निरंतर स्मरण। मन को बार-बार भगवान की ओर मोड़ने का अभ्यास। परम जप: 'अजपा जप' — श्वास में 'हं-सः' — 24 घंटे 21,600 बार स्वतः।

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विस्तृत उत्तर

मंत्र जप के अर्थ का वर्णन पाणिनि के व्याकरण और मंत्र महोदधि में मिलता है:

'मंत्र' की व्याकरणिक व्युत्पत्ति

  • ▸'मन्' (धातु) = मनन करना, चिंतन करना
  • ▸'त्र' (प्रत्यय) = त्राण — रक्षा
  • ▸अर्थ: 'जो मनन करने पर रक्षा करे'

'जप' की व्युत्पत्ति

  • ▸'जप्' (धातु) = धीरे-धीरे बोलना, मन में दोहराना
  • ▸जप = मंत्र की आवृत्ति

मंत्र जप का गहरा अर्थ

1देवता का स्मरण

हर मंत्र = एक देवता का नाम या गुणगान। जप = देवता का निरंतर स्मरण।

2ध्वनि-अर्थ एकता

तंत्र शास्त्र: संस्कृत में शब्द और उसका अर्थ — दोनों एक ही ध्वनि से जुड़े हैं। 'अग्नि' बोलने से गर्मी का अनुभव — यह अकारण नहीं।

3निरंतर स्मरण

जप = अनवरत स्मरण। भागवत: 'स्मरणं' नवधा भक्ति का तृतीय अंग।

4मन का परिष्कार

जप = मन को बार-बार भगवान की ओर मोड़ना। यह अभ्यास धीरे-धीरे मन को शुद्ध करता है।

जप का परम अर्थ

अजपा जप' — 'हंसः' — श्वास-प्रश्वास में स्वतः होने वाला जप: 'हं' = श्वास लेना, 'सः' = श्वास छोड़ना। 24 घंटे में 21,600 बार — यही परम जप।
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