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जप मुद्रा📜 पातंजल योग सूत्र — मुद्रा विज्ञान, मंत्र महोदधि — जप मुद्रा, तंत्र शास्त्र2 मिनट पठन

मंत्र जप करते समय हाथ कैसे रखें?

संक्षिप्त उत्तर

जप में हाथ: माला — दाहिने हाथ में गोमुखी में। ध्यान जप — ज्ञान मुद्रा (तर्जनी + अंगूठा = जीव-ब्रह्म एकता)। ध्यान मुद्रा — दाहिना हाथ बाएं के ऊपर, गोद में। नमस्कार मुद्रा — भक्ति जप में। सरलतम: हाथ गोद में, हथेली ऊपर।

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विस्तृत उत्तर

जप में हाथ की स्थिति का वर्णन पातंजल योग सूत्र और तंत्र शास्त्र में मिलता है:

माला जप में

  • दाहिना हाथ — माला के लिए
  • बाएं हाथ — गोद में, हथेली ऊपर
  • माला गोमुखी में रखें

ध्यान/मानस जप में मुद्राएं

1ज्ञान मुद्रा (सर्वाधिक प्रचलित)

तर्जनी और अंगूठे के अग्र भाग मिलाएं, शेष तीन उँगलियाँ सीधी। दोनों हाथ घुटनों पर — हथेली ऊपर।

  • तर्जनी = जीव
  • अंगूठा = ब्रह्म
  • मिलाना = जीव-ब्रह्म एकता

2ध्यान मुद्रा

दाहिना हाथ बाएं हाथ के ऊपर — दोनों हथेली ऊपर, गोद में। बौद्ध और हिंदू दोनों परंपराओं में।

3चिन मुद्रा

ज्ञान मुद्रा की तरह — किंतु हथेली नीचे।

4नमस्कार मुद्रा

दोनों हाथ हृदय के सामने जोड़कर — भक्ति जप में।

वैज्ञानिक

मुद्राओं में उँगलियों के सिरे — मस्तिष्क के विशेष भागों से जुड़े होते हैं। ज्ञान मुद्रा — prefrontal cortex सक्रिय → एकाग्रता।

सरलतम

यदि मुद्रा न आए — हाथ गोद में, हथेली ऊपर, शरीर ढीला — यही पर्याप्त।

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शास्त्रीय स्रोत
पातंजल योग सूत्र — मुद्रा विज्ञान, मंत्र महोदधि — जप मुद्रा, तंत्र शास्त्र
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