विस्तृत उत्तर
जप में हाथ की स्थिति का वर्णन पातंजल योग सूत्र और तंत्र शास्त्र में मिलता है:
माला जप में
- ▸दाहिना हाथ — माला के लिए
- ▸बाएं हाथ — गोद में, हथेली ऊपर
- ▸माला गोमुखी में रखें
ध्यान/मानस जप में मुद्राएं
1ज्ञान मुद्रा (सर्वाधिक प्रचलित)
तर्जनी और अंगूठे के अग्र भाग मिलाएं, शेष तीन उँगलियाँ सीधी। दोनों हाथ घुटनों पर — हथेली ऊपर।
- ▸तर्जनी = जीव
- ▸अंगूठा = ब्रह्म
- ▸मिलाना = जीव-ब्रह्म एकता
2ध्यान मुद्रा
दाहिना हाथ बाएं हाथ के ऊपर — दोनों हथेली ऊपर, गोद में। बौद्ध और हिंदू दोनों परंपराओं में।
3चिन मुद्रा
ज्ञान मुद्रा की तरह — किंतु हथेली नीचे।
4नमस्कार मुद्रा
दोनों हाथ हृदय के सामने जोड़कर — भक्ति जप में।
वैज्ञानिक
मुद्राओं में उँगलियों के सिरे — मस्तिष्क के विशेष भागों से जुड़े होते हैं। ज्ञान मुद्रा — prefrontal cortex सक्रिय → एकाग्रता।
सरलतम
यदि मुद्रा न आए — हाथ गोद में, हथेली ऊपर, शरीर ढीला — यही पर्याप्त।





