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विस्तृत उत्तर
मृत्यु के दिन आत्मा की शांति और शव की शुद्धि के लिए छः प्रारंभिक पिण्ड देने का विधान है। गरुड़ पुराण के अनुसार ये छः पिण्ड शवयात्रा के विभिन्न चरणों, जैसे देहली, चौराहे और विश्राम स्थल आदि पर दिए जाते हैं। यदि ये छः पिण्ड नहीं दिए जाते, तो पिण्डों के छः अधिष्ठाता देवता व्यापक विनाश करते हैं और शव अग्निदाह के योग्य, अर्थात पवित्र, नहीं माना जाता। इसलिए षट्पिण्ड विधान शवदाह से पहले अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
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