विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण और शिव पुराण में देवर्षि नारद के पाताल भ्रमण का विस्तार से वर्णन है। जब नारद मुनि तीनों लोकों का भ्रमण करते हुए पाताल पहुंचे और वहाँ से लौटकर स्वर्ग की देव-सभा में गए, तो उन्होंने देवताओं को पाताल की भव्यता का वर्णन सुनाकर आश्चर्यचकित कर दिया। नारद जी ने स्पष्ट कहा कि पाताल का ऐश्वर्य और वहाँ मिलने वाला इंद्रिय-सुख स्वर्ग से भी उत्तम है। उन्होंने वर्णन किया कि पाताल में दैत्यों और दानवों की जो कन्याएं विचरण करती हैं, उनका रूप और लावण्य इतना सम्मोहक है कि वे कठोर से कठोर तपस्वियों का भी मन मोह सकती हैं। वहाँ सूर्य का प्रकाश केवल उजाला देता है, संताप या गर्मी नहीं; और चंद्रमा केवल चांदनी फैलाता है, शीतलता या ठंडक नहीं। दानव पुत्र स्वादिष्ट भोजन और तीव्र मदिरा का पान करते हुए इतने आनंदित रहते हैं कि उन्हें समय के बीतने का पता ही नहीं चलता।
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