विस्तृत उत्तर
नारद जी ने पाताल लोकों को स्वर्ग से सुंदर इसलिए कहा क्योंकि उन्होंने अपनी ब्रह्मांडीय यात्रा के दौरान पाताल लोकों का भ्रमण किया और वहाँ का संपूर्ण अवलोकन किया। वापस स्वर्ग लौटने पर उन्होंने देवताओं की सभा में स्पष्ट रूप से कहा कि पाताल लोक, जिसमें सुतल भी प्रमुख रूप से सम्मिलित है, सौंदर्य, संपदा और वास्तुकला की दृष्टि से देवताओं के स्वर्ग से भी अधिक सुंदर और ऐश्वर्यशाली है। सुतल सहित बिल-स्वर्गों में भौतिक ऐश्वर्य, सुख-सुविधाएँ, प्राकृतिक सौंदर्य और विलासिता ऊर्ध्व लोकों के स्वर्ग से भी अधिक उन्नत, समृद्ध और निर्बाध बताई गई हैं।
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