विस्तृत उत्तर
महर्षि नारद ने पाताल और रसातल का सौंदर्य, संपदा और विलासिता देवराज इंद्र के स्वर्ग से भी अधिक बताया। उन्होंने एक बार इन लोकों का भ्रमण करने के बाद देवलोक में जाकर देवराज इंद्र और अन्य देवताओं के सामने स्वीकार किया कि पाताल और रसातल का सौंदर्य, संपदा और विलासिता इंद्र के स्वर्ग से कहीं बढ़कर है। रसातल के संदर्भ में यह बताया गया है कि वहाँ भव्य नगर, रत्न-स्फटिक और स्वर्ण से बने महल, सुंदर उद्यान, कल्पवृक्ष, दिव्य कमलों से भरे सरोवर और असुर कन्याओं का मनोहर सौंदर्य है।
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